नारी तू कल्याणी
नारी तू कल्याणी
जन्म लिया जिस घर में तुमने
उस की प्रतिफल छांव बनी
नन्ही किलकारी की गूंज
उस आंगन की शान बनी
धीरज सरल बनके तुमने
मात पिता को स्नेह दिया
सब कुछ अपना अर्पण कर
घर मात पिता का त्याग दिया
संस्कारों की ओढ चुनरिया
नये घर में प्रवेश किया
उस अजनबी घर को तुमने
अपने रंगों से सजा दिया
नारी तू कल्याणी
नये जीवन में उमंग भरकर
तुम जीवन का आधार बनी
तुम से नर है तुम से नारी
शक्ति का प्रमाण बनी
नारी तू कल्याणी इस जग का आधार बनी।
डॉ.रुपाली भारद्वाज
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