विरह वेदना

 अब नींद नहीं इन आँखों में,

जबसे दूर तुम हुए हो।


पहले बेफिक्र सोया करते थे


और नयी उड़ाने भरते थे 


नयन वही रातें वही 

नींद का ठिकाना नहीं 


जागते हुए खुद को तलाशा करते है 

जबसे दूर तुम हुए हो।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट