पता ही नहीं चलता

 Pata hi nhi chlta


दिल की धड़कन कब पैरों की थिरकन बन जाती है, पता ही नहीं चलता।

बात होंठो तक आते आते जुबान से यूं फिसल जाती है, पता ही नहीं चलता।

जिंदगी कब बादलों से गुजरती हुई रात तक पहुंच जाती है, पता ही नहीं चलता। ...

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