आजकल लोग जीवन से निराश बहुत जल्दी हो जाते,और अनचाही राहों में भटक जाते है घर परिवार से दूर कहीं अपने में ही खो जाते कुछ ऐसे निर्णय ले लेते हैं जो अनुचित होते हैं । उनसे यही कहना चाहूंगी जीवन के सकारात्मक पहलुओं को देखे।अपने परिवार में ही सच्ची खुशी का आनंद ले और जीवन को प्रति पल एक नये पाठ की तरह सीखे,उसमें उत्सुकता बनाये रखे जिससे आने वाली परेशानी के लिये तैयार रह सके। निश्चय ही फ़िर सभी का जीवन आनंदमय व्यतीत होगा। यही आस करती हूँ निराशा की बदली छँट जायेगी, कभी तो सुख की भोर आयेगी, और गर हिम्मत है हमारी पक्की, तो परेशानी कब तक हमारे द्वार आयेगी। धन्यवाद डॉ.रुपाली भारद्वाज