छूटा बचपन

 Chuta bachpan

बचपन की उन गलियों में,

हम जब भी जाया करते थे।

कुछ रंग लिए प्यार के 

कुछ गीतों के नए तराने गाते थे।

कुछ मां की लोरी कानों में, 

कुछ पापा डांटा करते थे।

बेशक वो दिन बचपन के  गलियों में गुजरा करते थे।

सब छूटे बचपन के साथी,

जो जान से प्यारे हुआ करते थे।

वो छूटा पिता का हाथ  भी, 

जो प्रेम अविरल बहाया करते थे। ...

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