प्रथम बालिका के जन्म के बाद हृदय में व्याप्त अनुभूतियों ने काव्य का रूप धारण कर लिया - हेलि मेरी प्यारी बिटिया सुमधुर इसका नाम है, इसके आ जाने से मुझको लगता स्वर्ग जहान है सूरज सी मुस्कान लिये वह और चंदा सी चंचल है उसकी पायल की छन छन से गूंजे सारा अंचल है। चिड़ियों सी चहकती है वह मीठी लगती तान है सुनकर इसकी प्यारी बोली खिलते तन मन प्राण है। दादाजी की राज दुलारी दादी की प्यारी पोती है पापा की है रानी बेटी मम्मी के आँचल सोती है। नानाजी की बड़ी लाडली नानी के मन को भाती है मामाजी की प्रिय भांजी मामी को नखरे दिखाती है। तनवी उसकी प्यारी दीदी दीदी को भी सबसे प्यारी है हर बच्चे की दोस्त बनी वह पर डॉल सहेली न्यारी है। प्रथम वर्ष गाँठ पर तुमको देंगे हम आशीष नवल इस जीवन के हर पथ पर भविष्य तुम्हारा हो उज्जवल नाम जहाँ में रोशन करना हम सबका ये अरमान है भरा रहे खुशियों से दामन देंगे देव यही वरदान है हेलि मेरी प्यारी बिटिया सुमधुर इसका नाम है इसके आ जाने से मुझको लगता स्वर्ग जहान है...... डॉ.रुपाली भारद्वाज