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मार्च, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

टूट कर संवरना

  फ़िर एक बार टूट कर  बिखरना है मुझे, नयी उड़ानो के लिये सँवरना भी है मुझे। आशाओं के दीप को  आँधियों से बचा कर, मंज़िल के आखिरी छोर पर,  पहुँचना भी है मुझे। डॉ.रुपाली भारद्वाज

परिवार का प्रेम

  हमारा परिवार ही हमारा सच्चा प्रेम है। लोग यहाँ वहाँ प्रेम की चाह में भटका करते हैं और धोखा खाते हैं । हमारा परिवार दुख सुख दोनों में हमारे साथ होता है।परिवार में हमारी गलतियों को भी क्षमा मिल जाती है। परिवार की छाँव होना जीवन में बहुत आवश्यक है शिकवे शिकायतों का दौर तो चलता रहता है इसलिये जहां तक हो सके अपने परिवार में ही सच्ची खुशी ढूँढ़ने का प्रयास करे। अपने परिवार वालों के समक्ष  ही प्रेम का अनूठा उदाहरण प्रस्तुत करे। डॉ.रुपाली भारद्वाज

विरह वेदना

  अब नींद नहीं इन आँखों में, जबसे दूर तुम हुए हो। पहले बेफिक्र सोया करते थे और नयी उड़ाने भरते थे  नयन वही रातें वही  नींद का ठिकाना नहीं  जागते हुए खुद को तलाशा करते है  जबसे दूर तुम हुए हो।

देश प्रेम

मेरे देश में खुशियों का कालीन बिछा दो, अब तो तिरंगे को ऊँचा उठ जाने दो। नहीं चाह हमें  किसी को नीचा गिराने की, पर हमें अपने ही  उपवन को चमन तो बनाने दो। जय हिन्द

निराशा बन जाए गी आशा

  आजकल लोग जीवन से निराश बहुत जल्दी हो जाते,और अनचाही राहों में भटक जाते है घर परिवार से दूर कहीं अपने में ही खो जाते कुछ ऐसे निर्णय ले लेते हैं जो अनुचित होते हैं । उनसे यही कहना चाहूंगी जीवन के सकारात्मक पहलुओं को देखे।अपने परिवार में ही सच्ची खुशी का आनंद ले और जीवन को प्रति पल एक नये पाठ की तरह सीखे,उसमें उत्सुकता बनाये रखे जिससे आने वाली परेशानी के लिये तैयार रह सके। निश्चय ही फ़िर सभी का जीवन आनंदमय व्यतीत होगा। यही आस करती हूँ  निराशा की बदली छँट जायेगी, कभी तो सुख की भोर आयेगी, और गर हिम्मत है हमारी पक्की, तो परेशानी कब तक हमारे द्वार आयेगी। धन्यवाद   डॉ.रुपाली भारद्वाज

नारी तू कल्याणी

  नारी तू कल्याणी जन्म लिया जिस घर में तुमने  उस की प्रतिफल छांव बनी नन्ही किलकारी की गूंज उस आंगन की शान बनी धीरज सरल बनके तुमने मात पिता को स्नेह दिया सब कुछ अपना अर्पण कर घर मात पिता का त्याग दिया संस्कारों की ओढ चुनरिया नये घर में प्रवेश किया उस अजनबी घर को तुमने अपने रंगों से सजा दिया नारी तू कल्याणी नये जीवन में  उमंग भरकर तुम जीवन का आधार बनी तुम से नर है तुम से नारी शक्ति का प्रमाण बनी नारी तू कल्याणी इस जग का आधार बनी। डॉ.रुपाली भारद्वाज

अध्ययन

  सतत अध्ययन है जरूरी  शिक्षा होगी तभी पूरी रात में पढ़ो या दिन में बस पढ़ते रहना है जरूरी हर ओर से ध्यान हटाकर  आगे बढ़ना है जरूरी सतत अध्ययन है जरूरी शिक्षा होगी तभी पूरी

मेरा सपना

  Mera sapna sach ho jae तुम सामने आ जाओ तो मेरा सपना सच हो जाए तुम मेरी तन्हाइयों को यूं मिटा दो तो मेरा सपना सच हो जाए  क हीं से फूलों की बारिश हो जाए तो मेरा सपना सच हो जाए कभी चांदनी रात में हवाएं  गुनगुनाएं  तो मेरा सपना सच हो जाए  कभी तुम, मैं और कभी मैं, तुम बन जाऊं तो मेरा सपना सच हो जाए। डॉ. रूपाली भारद्वाज

छूटा बचपन

  Chuta bachpan बचपन की उन गलियों में, हम जब भी जाया करते थे। कुछ रंग लिए प्यार के  कुछ गीतों के नए तराने गाते थे। कुछ मां की लोरी कानों में,  कुछ पापा डांटा करते थे। बेशक वो दिन बचपन के  गलियों में गुजरा करते थे। सब छूटे बचपन के साथी, जो जान से प्यारे हुआ करते थे। वो छूटा पिता का हाथ  भी,  जो प्रेम अविरल बहाया करते थे। ...

पता ही नहीं चलता

  Pata hi nhi chlta दिल की धड़कन कब पैरों की थिरकन बन जाती है, पता ही नहीं चलता। बात होंठो तक आते आते जुबान से यूं फिसल जाती है, पता ही नहीं चलता। जिंदगी कब बादलों से गुजरती हुई रात तक पहुंच जाती है, पता ही नहीं चलता। ...

Hum army vaale

  Hum army vaale हम आर्मी वाले लोग है एक जगह कहां टिकते है हमारे घर रेत के से लगते हैं। एक जगह अपना घर जमाना , मित्र बनाना और हर बार एक नए ढंग से सजाना । ये भूल जाते हैं कि एक दिन ये रेत के घर डह जाएंगे फिर भी चंद खुशियों को इनमें समेटे होते हैं जीवनसाथी के साथ में रहने की खुशी अनजान लोगों को भी अपना बना देती है वो सारे अजनबी अपने बन जाते हैं और जो हमारे अपने होते हैं वो दूर होते जाते हैं और फ़िर चल देते हैं एक नए रेत के घर की ओर ..... तब भी मुस्कुराते हैं जीवन के हर पहलू को जीते हैं और ईश्वर को धन्यवाद देते ...

नया वर्ष

 नया वर्ष  नये वर्ष के आगमन पर हर्षित मन हो जाता है,  पर अतीत के सायों से मन ये क्यु घबराता है।  क्या क्या खोया क्या पाया है पिछले पल में,  मन के सूक्ष्म कोने में सदैव स्थान वो पाता है।