बिखरते रिश्ते जज्बात कई दिल में छिपाये रहते हैं लोग, अपनों को ही गैरों के लिये छोड़ देते हैं लोग। थामा था दामन क्यूँ पल भर के लिये, क्यूँ दी खुशी पलक झपकाने तक भूल के सारी रस्म और हया गैरों का दामन थाम लेते हैं लोग। आँसुओं की कोई कद्र नहीं करते, बीते सुनहरे पल वो याद नहीं करते डुबोकर अपनी ही किश्ती को, सवार औरों की किश्ती पर हो जाते हैं लोग। डॉ.रुपाली भारद्वाज