बार्बी और बस्ती

माँ इस गली से नहीं गुजरा करो,मुझे ये छोटी सी बस्ती वाले रास्ते से गुजरना पसंद नहीं....कहते हुए बार्बी ने मुँह बनाया।
माँ अक्सर टू व्हीलर  से उस रास्ते से निकला करती  थी।
माँ ने बार्बी को समझाया- हमें इन लोगों से घृणा नहीं करनी चाहिये। ये लोग हमारे रोज़ मर्रा के कई कामों को अंजाम देते हैं  हमें इनके प्रति कम से कम सुहानुभूति का भाव रखना चाहिये। ऐसा  कहते ही अचानक गाड़ी के जोर से ब्रेक लगते है और बार्बी नीचे गिर जाती है वैसे चोट ज्यादा नहीं थी। घटना को देख कर आसपास के लोग इकठ्ठा हो जाते है बार्बी अपने आप में कुछ  खो जाती है। माँ गाड़ी आगे बढ़ाते हुए बोली -देखा बार्बी , जहां बड़ी कॉलोनी में लोगों के चेहरे ही दिखाई नहीं देते और किसी का किसी से कोई वास्ता नहीं होता वही ये लोग मदद  के लिये तत्पर होते है। अब बार्बी को ये बात अंदर तक समझ आ  रही थी।
डॉ.रुपाली भारद्वाज 

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