शिव आराध्य,देवों के देव
फ़िर कैसे उन्हें मनाऊँ मैं
पूजन,अर्चन,धूप,दीप करूँ
फ़िर कैसे उन्हें रिझाऊ मैं

बन जाऊँ गर गँगा मैया,
अर्पण कर दूँ बन,जल की धार
है सहज नहीं पर गंगा बनना,
फ़िर कैसे उन्हें रिझाऊ मैं।

बन जाऊँ गर गौरा मैया
नित अर्पण कर दूँ जीवन पतवार
है सहज नहीं पर गौरा बनना,
फ़िर कैसे उन्हें रिझाऊ मैं।


डॉ.रुपाली भरद्वाज


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