मुझे रात में कई दिनों से बड़े बुरे सपने आ रहे थे। कभी बहुत से लोग सपने में दिखते थे ,कभी समारोह परिदृश्य दिखाई देता था।क पूर्वज भी कई बार मेरे सपनों में आते थे और कई बार डरावने सपने दिखते थे जिससे मैं बहुत डर जाती थी,रेल परिदृश्य भी मेरे सपनों का हिस्सा थे। मेरे मन में कई प्रश्न उठ रहे थे जिनके जवाब में ढूँढ रही थी पर वास्तविकता के धरातल पर उनके जवाब मुझे नहीं मिले। सपनों का क्रम लगातर मुझे उद्वेलित कर रहा था। कई बार देर रात तक नींद भी नहीं आती थी और नींद आने पर फ़िर वही डरावने सपने। इन सपनों का मेरे वर्तमान जीवन से सम्बन्ध गहरा था,बस मुझे यही समझ आ रहा था पर स्पष्ट कारण से मैं अनभिज्ञ थी। इसी दरमियान मेरा मायके जाने का हुआ पहले से कोई निश्चित नहीं था,अचानक गयी तो सभी के चेहरे पर मुस्कान की लहरें दौड़ गयी,खास तौर पर मेरे पापा के चेहरे पर मुस्कान मेरे आने से ही आ गयी। हम बैठे कुछ बातें हुई जो बहुत दिनों से पापा के शांत व्यवहार की वजह से हो नहीं पा रही थी। इसी बीच सपनों का वही क्रम मुझे उलझा लेता। नित्य ही मेरे पापा सुबह सैर पर जाने लगे थे थोड़े दिन पहले ही उ...


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